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Archive for अगस्त 10th, 2009

दाल-ऐ-अरहर

देना ना मुझको ज़हर… दे दो मुझे दाल-ऐ-अरहर खातें हैं  इसे जोशी मनोहर, कैफ मोहम्मद और मोहम्मद अज़हर मेस में थी मेरी खाली कटोरी… किसी ने उसमें भर दी दाल पूरी स्वर्ण चंपा सी थी  वह पीली… मन मोहिनी मादक मन रसीली नूर-ऐ-लुत्फ़ हमें आने लगा… जब दाल-ऐ-अरहर का स्वाद दिल पे छाने लगा जब [...]

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