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Archive for अगस्त, 2009

नाम करो!

खुद के लिए भी क्या जीना है.. सब जी कर भी क्या करते हैं.. प्रतिस्पर्धा में खो जाते हैं.. आखिर घुट-घुट कर ही तो मरते हैं..   जीना कोई काम नहीं.. करना है अगर तो नाम करो.. मदद करो, उपकार करो.. मेहनत, सुबह से ले कर शाम करो..   आगे आओ न शर्माओ.. दुनिया को [...]

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असर..

तूने मुझे भुला दिया मुझको नहीं फिकर है.. तेरी यादों को भूल जाने का असल डर है.. चारों ओर सब बदल गया लेकिन मेरी आदतें नहीं बदली.. तूने छोड़ी जो अपनी छाप शायद उसका ही ये असर है..

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दाल-ऐ-अरहर

देना ना मुझको ज़हर… दे दो मुझे दाल-ऐ-अरहर खातें हैं  इसे जोशी मनोहर, कैफ मोहम्मद और मोहम्मद अज़हर मेस में थी मेरी खाली कटोरी… किसी ने उसमें भर दी दाल पूरी स्वर्ण चंपा सी थी  वह पीली… मन मोहिनी मादक मन रसीली नूर-ऐ-लुत्फ़ हमें आने लगा… जब दाल-ऐ-अरहर का स्वाद दिल पे छाने लगा जब [...]

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नैराश्य..

सच से ना भाग क्योंकि भाग्य को नहीं कोसना है.. हर सवाल का जवाब तुझे खुद से ही पूछना है.. शंका में क्यों है तू कर्म ही तेरा धर्म है.. नर्म रुख त्याग चोट मार लोहा गर्म है.. सकारात्मक रख सोच को असफलता को भूल कर.. सफल अवश्य होगा पहले नैराश्य को तो दूर कर..

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सफलता!

जीवन कठिन है ये मैंने जाना है.. राह में कितनी ही रुकावटों को पाना है.. चोट मैं खाऊंगा लेकिन आंसूं न बहाऊंगा.. परिस्थिति कैसी भी हो मैं हँस कर रहूँगा.. सफलता के पथ पर सदा अग्रसर रहूँगा..

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पथ से भटका, भविष्य अधर में लटका.. गलत राह पर चलने से लगा था मुझे ये झटका!.. परन्तु सत्य का ज्ञान हुआ, लक्ष्य का ध्यान हुआ.. जीवन की प्राथमिकता का सम्मान करना चाहता हूँ.. एकाग्रचित्त हो कर बस काम करना चाहता हूँ..

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बचपन :)

वो वक़्त भी विचित्र था जब नेत्रों में सुखद चित्र था.. भय से दूर चिन्तामुक्त मेरा मन कोमल और पवित्र था!!  

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अभागा..

प्यासे तड़प रहे हैं साहिल करीब रे.. पैसे के पीछे भागे ये दुनिया गरीब रे.. मैं तो संतुष्ट था उससे अब तक जो मिला था.. पर अब क्या करे अभागा जब रोया नसीब रे!!

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