मुझको यकीं है सच कहती थी जो भी अम्मी कहती थी,
जब मेरे बचपन के दिन थे चाँद पे परियां रहती थीं …
लेकिन वो परियां कहाँ गईं, हर चाँद सितारा टूट गया …
जीवन की इस दौड़ में बचपन पीछे कहीं छूट गया
मुझको यकीं है सच कहती थी जो भी अम्मी कहती थी,
जब मेरे बचपन के दिन थे चाँद पे परियां रहती थीं …
लेकिन वो परियां कहाँ गईं, हर चाँद सितारा टूट गया …
जीवन की इस दौड़ में बचपन पीछे कहीं छूट गया
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खुद के लिए भी क्या जीना है..
सब जी कर भी क्या करते हैं..
प्रतिस्पर्धा में खो जाते हैं..
आखिर घुट-घुट कर ही तो मरते हैं..
जीना कोई काम नहीं..
करना है अगर तो नाम करो..
मदद करो, उपकार करो..
मेहनत, सुबह से ले कर शाम करो..
आगे आओ न शर्माओ..
दुनिया को कुछ देकर जाओ..
दुनिया भी तुम्हें फिर याद करे..
उम्मीद करे और प्यार करे..
सुनिश्चित करो कोई दुखी न हो..
हर व्यक्ति को सम्मान मिले..
वो खुश हो जाये वो मुस्काए..
हर पल कलियों के समान खिले..
जिस दिन ऐसा हो जाएगा..
खुद को खुदा के पास तू पाएगा..
लघु है जीवन, वक़्त पर काम करो..
मोह को त्याग दो और अपना नाम करो!
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तूने मुझे भुला दिया मुझको नहीं फिकर है..
तेरी यादों को भूल जाने का असल डर है..
चारों ओर सब बदल गया लेकिन मेरी आदतें नहीं बदली..
तूने छोड़ी जो अपनी छाप शायद उसका ही ये असर है..
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देना ना मुझको ज़हर… दे दो मुझे दाल-ऐ-अरहर
खातें हैं इसे जोशी मनोहर, कैफ मोहम्मद और मोहम्मद अज़हर
मेस में थी मेरी खाली कटोरी… किसी ने उसमें भर दी दाल पूरी
स्वर्ण चंपा सी थी वह पीली… मन मोहिनी मादक मन रसीली
नूर-ऐ-लुत्फ़ हमें आने लगा… जब दाल-ऐ-अरहर का स्वाद दिल पे छाने लगा
जब हुआ दाल-ऐ-अरहर और चावल का संगम… चक्षु के समक्ष प्रकट हुआ एक द्रिश्य विहंगम
देना न मुझको ज़हर, दे दो मुझे दाल-ऐ-अरहर
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सच से ना भाग क्योंकि भाग्य को नहीं कोसना है..
हर सवाल का जवाब तुझे खुद से ही पूछना है..
शंका में क्यों है तू कर्म ही तेरा धर्म है..
नर्म रुख त्याग चोट मार लोहा गर्म है..
सकारात्मक रख सोच को असफलता को भूल कर..
सफल अवश्य होगा पहले नैराश्य को तो दूर कर..
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जीवन कठिन है ये मैंने जाना है..
राह में कितनी ही रुकावटों को पाना है..
चोट मैं खाऊंगा लेकिन आंसूं न बहाऊंगा..
परिस्थिति कैसी भी हो मैं हँस कर रहूँगा..
सफलता के पथ पर सदा अग्रसर रहूँगा..
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पथ से भटका, भविष्य अधर में लटका..
गलत राह पर चलने से लगा था मुझे ये झटका!..
परन्तु सत्य का ज्ञान हुआ, लक्ष्य का ध्यान हुआ..
जीवन की प्राथमिकता का सम्मान करना चाहता हूँ..
एकाग्रचित्त हो कर बस काम करना चाहता हूँ..
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